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कहानीहिन्दी में गद्य लेखन की एक विधा है। उन्नीसवीं सदी में गद्य में एक नई विधा का विकास हुआ जिसे कहानी के नाम से जाना गया। … मनुष्य के जन्म के साथ ही साथ कहानी का भी जन्म हुआ और कहानी कहना तथा सुनना मानव का आदिम स्वभाव बन गया। इसी कारण से प्रत्येक सभ्य तथा असभ्य समाज में कहानियाँ पाई जाती हैं।

कहानी- 

साहित्य की सभी विधाओ में कहानी सबसे पुरानी विधा हैं. जनजीवन में यह सबसे लोकप्रिय विधा हैं. प्राचीन कालो में कहानियों को, कथा, आख्यायिका, गल्प आदि कहा जाता था. आज के समय में कहानी सबसे अधिक प्रचलित है. साहित्य में यह अब अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है. पहले के समय मे कहानी उपदेश देना या मनोरंजन करना माना जाता था. आज इसका लक्ष्य मानव जीवन की विभिन्न समस्याओं और संवेदनाओ को व्यक्त करना है. यही कारण है कि प्राचीन काल की कहानी से आज की कहानी बिल्कुल भिन्न हो गयी है, आज आधुनिक काल में इसकी आत्मा भी बदली है और शैली भी.

कहानी को साहित्य विद्वानों ने परिभाषित करने का अनेक प्रकार से प्रयत्न किया है. किंतु कहानी को किसी एक परिभाषा में नहीं बाँधा जा सकता. यह सत्य है कि इन परिभाषाओ से कहानी कला की मूल प्रकृति का न्यूनाधिक परिचय अवश्य मिलता है. कहानी के स्वरूप का बोध कराने वाली कुछ परिभाषाएं इस प्रकार हैं.. 

     प्रसिद्ध अमरीकी लेखक एडगर एलन पो के अनुसार, “छोटी कहानी एक ऐसा आख्यान है जो इतना छोटा हो कि एक बैठक मे पढ़ा जा सके और जो पाठक पर एक ही प्रभाव उत्पन्न करने के उद्देश्य से लिखा गया हो, जिसमे प्रभाओत्पादकता में बाधक तत्वों का त्याग हो और जो स्वतः पूर्ण हो.”

प्रसिद्ध समीक्षक विलियम हेनरी के अनुसार, “लघुकथा में केवल एक ही मूलभाव होना चाहिए. उस मूलभाव का विकास केवल एक ही उद्देश्य को ध्यान मे रखते हुए सरल ढंग से तर्कपूर्ण निस्कर्षो के साथ करना चाहिए.”

     जान फास्टर ने कहानी की परिभाषा इस प्रकार दी है, “असाधारण घटनाओ की वह श्रृंखला जो परस्पर सम्बद्ध होकर एक चरम परिणाम पर पहुँचाने वाली हो.”

     भारतीय कथाकार मुंशी प्रेमचंद्र के अनुसार, “कहानी एक ध्रुपद की तान है, जिसमें गायक महफिल शुरू होते ही अपनी संपूर्ण प्रतिभा दिखा देता है. एक क्षण में चित्त को इतने माधुर्य से परिपुरित कर देता है, जितना रातभर गाना सुनने से भी नही हो सकता.”

     एक अन्य स्थान पर मुंशी प्रेमचंद्र ने कहानी के बारे मे लिखा है- “कहानी का उद्देश्य समपुर्ण मनुष्य को चित्रित करना नहीँ, अपितु उसके चरित्र का एक अंग दिखलाना है.”

     पं. रामचंद्र शुक्ल के अनुसार, ” कहानी साहित्य का वह रूप है, जिसमे कथा प्रवाह एवं कथोपकथन में अर्थ अपने प्रकृत रूप मे अधिक विद्यमान रहता है.

कहानी- साहित्य की सभी विधाओं में कहानी सबसे पुरानी विधा है, जनजीवन में यह सबसे अधिक लोकप्रिय है। प्राचीन कालों मे कहानियों को कथा, आख्यायिका, गल्प आदि कहा जाता है। आधुनिक काल मे कहानी ही अधिक प्रचलित है। साहित्य में यह अब अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है। पहले कहानी का उद्देश्य उपदेश देना और मनोरंजन करना माना जाता है। आज इसका लक्ष्य मानव- जीवन की विभिन्न समस्याओं और संवेदनाओं को व्यक्त करना है।

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