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कंजूस लड़की को लूट लिए

kanjus ladki ko loot Liye ( कंजूस लड़की को लूट लिए ) |

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कंजूस लड़की को लूट लिए

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kanjus ladki ko loot Liye ( कांजस लड़की को लूट लिए ) short story my name – vimal bhagat my website – https://delynewstime.com/ gmail – vimalbhagat.vb12@gmail.com instagram id – vivaan_bhagat_55 #short story #kanjus ladki

कंजूस लड़की को लूट लिए –

शब्दसागर

कंजूस वि॰ [सं॰ कण+हिं॰ चूस] [संज्ञा कंजूसी] जो धन का भोग न करे । जो न खाय और न खिलावे । कृपण । सूम । मक्खी- चूस ।

  • कंजूस व् मितव्ययी में अत्यंत महीन अंतर है अत: इन दोनों शब्दों का प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए
  • मितव्यय एक संयमित आचरण है जबकि कृपणता एक भाव है
  • जैसे : –”निर्दय कहा दया करे, कृपन दए कहा दान’अर्थात : -निर्दय क्या दया करेगा वह कृपण है क्या दान करेगा ? यहाँ मितव्ययी शब्द प्रयुक्त नहीं होगा क्योंकि दान एक भाव है व्यवहार नहीं
  • सबहि जोग ले जोग जुगाई | मित बययता सुठि गह चराई ||

संबंधितआपके हिसाब से कंजूस और मितव्ययी में क्या अन्तर होता है ?

मितव्ययी – वह व्यक्ति जो केवल ज़रूरत के हिसाब से खर्चा करता है और फालतू की चीज़ें नहीं खरीदता और हो सके तो अपनी ज़रूरतों को कम से कम रखने का प्रयत्न करता है।

कंजूस – वह व्यक्ति जो हर जगह पैसे बचाने के बारे में सोचता रहे। जो ज़रूरत की चीज़ें भी नहीं ख़रीदता और उन चीज़ों को दूसरों से मांग कर गुज़ारा करता है बेशक उसके पास उसे खरीदने के पैसे हों।

जब तक व्यक्ति अपनी मितव्ययिता को अपने तक सीमित रखता है तब तक तो वो मितव्ययी बना रहता है लेकिन जब इससे दूसरे लोग भी प्रभवित होने लगें तब वह कंजूसों की श्रेणी में प्रवेश कर जाता है।

संबंधितईमानदारी क्या है?

सबसे पहले जवाब दिया गया: ईमानदारी क्या है।?

ईमानदारी को समझने के लिए पहले बेईमानी को जानना होगा.। दुसरे की अधिकारिक वस्तु पर उसका अधिकार न मानना बेईमानी है।

बहुत सी चालाकियां अक्सर बेईमानी ही होती है उसको चीनी में लपेट कर प्रस्तुत करना बेईमानी से संबंधित होती है जैसे रेल में टिकट न लेना अधिक पैसे आने पर न लौटाना ,बिन बताए किसी को नुक्सान पहुंचा कर अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करने जैसी बातें लोग बहुत शान के साथ बताते हैं पर है-तो यह बेईमानीही। यह मन बचन कर्म तीनों में की जा सकती है।

इसके विपरीत अवस्था ईमानदारी है। यह किसी भी ‌रुप मे की जा सकती है।मन बचन कर्म तीनों में इसका प्रदर्शन होता है। किसी की वस्तु को नअपनाना , हर जगह कानून सम्मत कार्य करना हानि होने पर सच व्यहार करना जैसी बातें ईमानदारी के अंतर्गत आती है।

‌जिस में कानून सम्मत सत्य व्यहार किया जाता है वह ईमानदारी कहलाती है।

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